Tuesday, August 24, 2010

देश के वर्तमान हालात

रोज रोज शाजिश होती है यहाँ देश के साथ
लगता है वो मिले हुए हैं गद्दारों के साथ
इसी लिए उन की ही भाषा बोल रहे हैं उल्लू
गठ्बन्धन हो चुका है उन का आतंकी के साथ

देश के टुकड़े करने की ये मांग रहे आजादी
जितनी मिलती छूट और करते दुगनी बर्बादी
फिर भी बिके हुए ये नेता उन के गुण गाते हैं
बेशक हमला करें और वे पत्थर बरसाते हैं

जैसे भी हो दिल्ली की सत्ता पर काबिज रहना
बेशक करना पड़े किसी भी दुश्मन से समझौता
पर कुर्सी पर आंच नही कैसे भी आने पाए
देश लूटे लुट जाये उन्हें क्या इस से लेना देना

यदि देश के लिए कोई भी अच्छा काम करेगा
अमित शाह की तरह जेल में पानी खूब भरेगा
क्योंकि आतंकी को उस ने कहते हैं मरवाया
गद्दारों ने आतंकी हित इतना शोर मचाया

सब को है ये पता किइशरत आतंकी लौंडी थी
सब को पता चली है उस कीकहाँ बंधी डोरी थी
पर उस के मरने पर भी ये हंगामा करते हैं
लगता है इन की भी माँ तो उन के संग सोई थी

आतंकी चाहे कैसा हो ये उस के गुण गएँ
करें देश पर भी हमला वो फिर भी भले कहाएँ
बेशक आतंकी हो या फिर अंदर वर्ल्ड सरगना
कौशिश ये करते हैं उन्हें आंच न कोई आये

3 comments:

सुलभ § Sulabh said...

गठ्बन्धन हो चुका है उन का आतंकी के साथ
...बस यही सब चल रहा है देश में.

परमजीत सिँह बाली said...

बहुत बढ़िया सामयिक रचना है। सही लिखा है....

sushil said...

Dr.Sahab,
This is the real fact of the day. Every where we find such type of currupt politician/beaurocracy.