Saturday, May 7, 2011

समुद्र वसने देवी ...... मदर दे

कई दिनों से मदर दे का बहुत शोर मच रहा है क्योंकि यह विदेश से आई हुई जूठन है जिसे चाट कर कुछ लोग अपने को सौभाग्य शाली बनने का प्रयत्न कर रहे हैं
मेरा उन से निवेदन है कि भारत में या हिन्दू संस्कृति में प्रत्येक दिन मात्र दिवस है
१ क्योंकि यहाँ कई माँ नही होती
२जो होती हैं वे सब पूज्य होती हैं जैसे भारत माता, पृथ्वी माता ,गौ माता ,स्त्री यानि मात्री शक्ति या देवी माता सभी पूजनीय हैं
हम प्रात: काल सर्व प्रथम पृथ्वी माता को प्रणाम करते हैं पद स्पर्श क्ष्मस्व्मे .......
हमारे यहाँ मात्र देवो भव सर्व प्रथम आता है बाद में पिता व आचार्य आते हैं
अत: हम तो प्रत्येक दिन माँ के लिए श्रद्धा निवेदन करते हैं एक दिन नही जो एक दिन करते हैं वे या तो भारतीय नही है या उन्हें जूठन चाटने की बीमारी है
अत; आओ नियमित अपने माता पिता की सेवा में संलग्न रहने का वृत्त लें
क्यों कि लिखा है
प्रात काल उठ कैरघुनाथ ,मत पिता गुरु नावैन्ही माथा
डॉ. वेद व्यथित

4 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

भारतीय संस्कृति में मातृत्व के बहुत आधार हैं।

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (9-5-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

Rahul Singh said...

इतना आक्रोश, वह भी मां का नाम आ जाने के बाद, अच्‍छा नहीं,

दिगम्बर नासवा said...

जब हर दिन माँ के लिए है तो आज का भी क्यों नही ...