Friday, April 30, 2010

देश की वर्तमान दुखद स्थिति पर दो मुक्तक

नैतिकता अब कहाँ खो गई देश का कैसा हाल हुआ
देश को गिरवी रख कर के भी उन को नही मलाल हुआ
आखिर लाज सुरक्षित कैसे भारत की रह पाएगी
जिम्मेदार कौन इस का है देश का जो ये हाल हुआ

बाहर गला फाड़ चिल्लाते संसद में शरणागत हैं
सौदेबाजी रोज नई है ये ही उन की आदत है
ऐसे ऐसे देश के नेता माननीय कहलाते हैं
इन लोगों का क्या कर लोगे कैसी आई आफत है

इस लम्बी दाढ़ी में कितने राज छुपाये हो बाबा
बाहर कुछ है अंदर कुछ है वैसे बने हुए बाबा
कितनी हद्द हो गई इस से भी ज्यादा क्या गिरना है
जिस पत्तल में खाते उस में छेड़ कर रहे हो बाबा
डॉ. वेद व्यथित
http://sahityasrjakved.blogspot.com
dr.vedvyathit@gmail.com

3 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा!

हरकीरत ' हीर' said...

नैतिकता अब कहाँ खो गई देश का कैसा हाल हुआ
देश को गिरवी रख कर के भी उन को नही मलाल हुआ
आखिर लाज सुरक्षित कैसे भारत की रह पाएगी
जिम्मेदार कौन इस का है देश का जो ये हाल हुआ

बहुत खूब ....!!

सुधाकल्प said...

एक -एक पंक्ति सारगर्भित है
सुधा भार्गव
sudhashilp.blogspot.com