Saturday, April 10, 2010

दांते वाडामें शहीद हुए जवानो के प्रति

इस के बाद बचा ही क्या है और अधिक कुछ कहने को
बंधुआ हैं जवान बेचारे गोली कहा कर मरने को
क्यों कि तो लौह भवन में चैन की वंशी बजा रहे
क्योंसंकल्प नही करते हो माओ वाद से लड़ने को

सत्ता सोच रही है कितनी और बलि चाहिए उस को
मरवा कर इतने जवान भी कहाँ तसल्ली है उस को
फिर भी सख्ती से लड़ने की हिम्मत नही जुटापाई
इन के बल पर कुर्सी पाई क्यों खोएगी वो उस को

तथा कथित मानवतावादी कहाँ बिलों में सोये हैं
जब भी कांटा चुभा शत्रु को वो आंसू से रोये हैं
पर जवान की विधवा ,बहना बच्चे इन को दिखे नही
कैसे उल्लू के पठ्ठे हैं गहरी निद्रा सोये हैं
डॉ. वेद व्यथित

6 comments:

Shekhar kumawat said...

bahut sundar rachna

shekhar kumawat

http://kavyawani.blogspot.com/

HTF said...

वक्त आ गया है गद्दारों के मिटने का

कविता रावत said...

तथाकथित मानवतावादी कहाँ बिलों में सोये हैं
जब भी कांटा चुभा शत्रु को वो आंसू से रोये हैं
पर जवान की विधवा ,बहना बच्चे इन को दिखे नही कैसे उल्लू के पठ्ठे हैं गहरी निद्रा सोये हैं
.....en tathakathith manavtavaadion ke karan aam janta ko eska khamiyaja bhugtana padta hai..
Aapka aakrosh vajib hai aur aisa har ek kee soch ban jay aur jagrukta aa jay to phir aisi naubat nahi aayegi....

सुलभ § सतरंगी said...

बहुत सही कहा. जरुरी सन्देश. सोये को जगाना तो पड़ेगा ही.

zeal said...

kavita ji se sehmat hun

shukla said...

excellant words has been described by Dr ved for the society for the upliftmment of the brain of the people who have the idea of DESH BHAKTI and feeling of their nation JAI HO