Monday, April 19, 2010

जन का तन्त्र पित रहा नित दिन आई पी एल की विकटों पर
अरबों खरबों का किस्सा है आई पी एल की विकटों पर
राजनीति का खेल नया ये भैया खूब निराला है
खूब लुटी जनता बेचारी आई पी एल कि विकटों पर

2 comments:

subhash said...

ved ji
a man aware.

neta,pulis aur adalatein,
sab bhrasht ho geyeen,
paison se milen digriyaan,
terakki bahut ho geyeen.

subhash

vedvyathit said...

सुभाश जी
हार्दिक आभार
वेद व्यथित