Monday, October 25, 2010

रपट

हम कलम साहित्यिक संस्था (पंजी)द्वारा गुडगाँव में लघु कथा पर गोष्ठी का आयोजन किया गया जिस कि अध्यक्षता की प्रख्यात साहित्य कार डॉ.शेर जंग गर्ग ने गोष्ठी के प्रथम सत्र में लघु कथा के स्वरूप पर विचार विमर्श किया गया चर्चा प्रारम्भ करते हुए डॉ. नन्दलाल महता ने लघु कथा को संवेदना की तीव्र सम्प्रेश्नीयता बताया कुरुक्षेत्र से आये डॉ. ईश्वर चन्द्र गर्ग ने अपने पत्र में कहा कि लघु कथा ने अपनी साहित्यिक उपादेयता सिद्ध कर दी है इसी लिए लघुकथा को बाक्स में स्थान मिलता है लघु कथ का आधार समाज है और व्यंग उस का हथियार है चर्चा को आगे बढ़ाते हुए डॉ. संतोष गोयल ने लघु कथा को नाविक के तीर बताया व जीवन की सच्चाइयों से सीधा सम्वाद करती हुई रचना कहा भिवाड़ीसे आये डॉ. असीम शुक्ल ने कहा कि जिस तरह एक बाल्टी पानी में एक बूँद तेल डालने से उस में बहुत से रंग उत्पन्न हो जाते है उसी प्रकार लघु कथा एक साथ बहुत सारे रंग पैदा करती है अंग्रेजी साहित्यकार डॉ. केदार नाथ शर्मा ने इसे अंग्रेजी की शोर्ट स्टोरी की हिंदी में आगत विधा कहा डॉ.वेद व्यथित निशा भार्गव ने भी इस पर अपनर विचार रखे
दूसरे सत्र में लेखकों द्वारा लघु कथाओं का वचन किया गया इस में डॉ. वेद व्यथित ने लघु कथा पढ़ी आग और हवा , निशा भार्गव ने बचपन का गूंगा पन डॉ. ईश्वर गर्ग ने बुढ़ापा सुनीता शर्मा ने धूप छँव आभा कुलश्रेष्ठ ने रधिया क्यों डूबी रमेश पाठक ने लक्ष्मी का वाहन लघु कथा का पाठ किया
इस अवसर पर डॉ सुनीति रावत के लघु कथा संग्रह "तीर तरकश के " पुस्तक का लोकार्पण हुआ तथा डॉ. सुनीति रावत ने इस अवसर पर इस संग्रह से कुछ लघु कथाएं भी प्रस्तुत कीं
अंत में डॉ. शेरजंग गर्ग ने कहा कि लघु कथा में वस्तु तो है पर उस का विस्तार नही है वह सीधे प्रहार करती है सब के कहने पर उन्होंने तथा नरेंद्र लहद ने कुछ गजलें भी पढ़ीं

1 comment:

arun c roy said...

अच्छी रपट.. कभी लघुकथा भी पोस्ट कीजिये