Sunday, July 24, 2011

चौपदे

भूलो राम राज की बातें ये ही अपना नारा है
घपलिस्तान बनायेंगे हम यही हमारा नारा है
अन्ना ,बाबा तो बेचारे यूँ ही खुद मर जायेंगे
बेवकूफ ये जनता है हम इस को नाच नचाएंगे ||

अन्ना जी क्या याद नही है पांच जून की घटना
अच्छी तरह हमे आता है मुंह को बंद करना
नही भूलना पांच जून को फिर दोहरा सकते हैं
शासन कैसे करना है ये हम को नही बताना ||

आजादी का जश्न मनाओ ये किस ने रोका है
पर सत्ता न हाथ लगेगी ये केवल धोखा है
सत्ता पर तो केवल और केवल अधिकार हमारा
बाक़ी कुछ भी करो और हम ने किस को रोका है ||

अब के लाल किले से जब झंडा फहराया जायेगा
उस के बाद बहुत सी बातों को फिर दोहराया जायेगा
पर मंहगाई और आतंकी घटना कम न होंगी
इसी तरह से देश खूब यूं ही लुटवाया जायेगा ||

मन्तर मैंने पढ़े और बिल में तुम हाथ लगा लो
घोटालों की हिस्से दारी चुपचाप पंहुंचा दो
बोलोगे तो पता तुम्हे है हम क्या कर सकते हैं
कुछ दिन मुंह पर अंगुली रख कर जेल में मौज उड़ा लो ||

पिछले सालों की भांति ही पन्द्रह अगस्त मनेगा
उसी भांति ही लाल किले पर झंडा भी फहरेगा
पर जिस अंतिम व्यक्ति कि गाँधी ने बात कही थी
शायद वो बेचारा तो अब दूर भी नही दिखेगा

4 comments:

Dr Varsha Singh said...

बहुत सुन्दर समसामयिक रचना...

anu said...

सटीक शब्दों में ...आज के वक़्त के सच की अभिव्यक्ति

प्रवीण पाण्डेय said...

क्या से क्या हो गये, वेवफा, तेरे प्यार में।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सटीक बात कही है ..आज यही हालात हैं