Friday, June 18, 2010

मित्रों का आभारी हूँ
जिन्होंने मेरी नव गीतिका को स्नेह दिया खास कर उन मित्रों का जिन्होंने अपनी नेहटिप्पणियों से मेरा उत्साह वर्धन किया है इनमे बहन फिरदौस ,वन्दना जी ,म,वर्मा जी बेर अनुज सुलभ व सभी अन्य मित्र
इसी नेह के कारण एक और नव गीतिका आप के सामने रखने कि हिम्मत कर रहा हूँ
"नव गीतिका
तुम्हारे गीत पैने है ये दिल के पार जाते हैं
तुम्हारे आँख के मोती बहुत दिल को दुखाते हैं
सुहाने बादलों कीबात क्यों उन को सुहाएगी
सुरीली तान सुन कर गम बहुत से याद आते हैं
तुम्हारा ही दिया है घाव ये भरता नही है जो
तुम्हारे बोल मीठे हैं वह नश्तर चुभाते हैं
नही भटके हवा मैं मान लूं कैसे यह होगा
बहुत से रास्ते के मोड़ जब उस को सताते हैं
हवा भी चाहती ठहराव तो उस का कहीं पर हो
कहाँ ठहरे समय के जब बढ़े ही पांव जाते हैं
कहीं गया तो होगा गीत जब तुम ने कहीं कोई
उसी के बोल ही आ कर यहाँ मुझ को सताते हैं
पुन:बौरा गये हैं आम तुम ने तन छेड़ी है
पपीहा और कोयल भी उसे ही रोज गाते हैं
तुम्हे कैसे बताऊँ प्रश्न जो मन में मेरे आते
वही क्या प्रश्न शायद रोज तुम को भी सताते हैं
तुम्हीने भूल कर के भी वह बाते नही छोड़ी
किजिन से जिन्दगी के गम हमेशा दूर जाते है
व्यथा कि क्या कहूँ मुझ को यह मीठी बहुत लगती
मुझे मरे सभी अपने तभी तो याद आते हैं
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4 comments:

इस्लाम की दुनिया said...

मोमिन : एक क्रांति का नाम है. मोमिन ने इस्लाम के कुत्तों को उनकी औकात बता दी है.

http://harf-e-galat.blogspot.com/

http://harf-e-galat-ll.blogspot.com/

 इस्लाम अय्याशी और हिंसा का मजहब है. इसको मानने वाले मुहम्मद उमर कैरान्वी, जमाल, असलम कासमी, सलीम खान, अयाज अहमद, सफत आलम, एजाज इदरीसी, जीशान, इम्पैक्ट, खुर्सीद जैसे देशद्रोही, कृतध्न, जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं, ब्लोगों पर हिन्दुओं के विरुद्ध इतना विष वामन करते हैं तो इनकी मस्जिदों में क्या नही होता होगा? कोई भी अनुमान लगा सकता है. विदेश से पैसा लेकर इस्लाम का प्रचार और हिन्दू धर्म का अपमान कर रहे हैं.

सुलभ § Sulabh said...

ये नव गीतिका तो सुन्दर अहसासों से भरी है.

और हाँ, "पानी" पर लिखी पंक्तियाँ भी भरपूर है

सतीश सक्सेना said...

नुक्कड़ पर आपके द्वारा ब्लागवाणी के समर्थन में किये गए कमेंट्स अच्छे लगे ! आप जैसे लोगों की कमी है यहाँ , शुभकामनायें !

डा.सुभाष राय said...

Ved bhai, aap kee geetikaayen main srijangatha par bhee kai baar padh chukaa hoon. aap kee rachnao kee maasumiat, unkee vyatha aur unhen vykt karne ka aap ke sureelaa andaaj mujhe bahut pasand hai. kabhee phursat mile to aap kee najar chaahoonga saakhi par
www.sakhikabira.blogspot.com