Friday, February 10, 2012

स्त्री


स्त्री

पुरुष यानि व्यक्ति
जो सो सकता है पैर फैला कर
सारी चिंताएँ हवाले कर
पत्नी यानि स्त्री के
और वह यानि स्त्री
जो रहती है निरंतर जागरूक
और और देखती रहतीहै
आगम कि कठोर
नजदीक आती परछाईं को
और सुनती रहती है
उस कि कर्कश पदचापों कि आहट
क्यों कि सोती नही है वह रात रात भर
कभी उडाती रहती है सर्दी में
बच्चों को अपनी ह्रदय अग्नि
और कभी चुप करती रहती है
बुखार में करते बच्चे को
या बदलती रहती है
छोटे बच्चे के गीले कपडे
और स्वयम पडी रहती है
उस केद्वारा गीले किये पर
या गलती है हिम शिला सी
रोते हुए बच्चे को ममत्व कापय दे कर
और कभी कभी देती रहती है
नींद में बडबदाते पीटीआई यानि पुरुष के
प्रश्नों का उत्तर
मैं क्यों कि उसे तो जागना ही निरंतर है
डॉ. वेद व्यथित

8 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

धारिणी का कार्य सतत करती है स्त्री...

vandan gupta said...

यही है स्त्री जीवन

जितेन्द्र ‘जौहर’ Jitendra Jauhar said...

त्याग और ममता की पर्याय है-स्त्री।

Smart Indian said...

शिक्षाप्रद और अनुकरणीय जीवन!

Anju (Anu) Chaudhary said...

औरत की जीवनी को बहुत सरल शब्दों में लिख दिया आपने ......धारणी जो कभी भी खुद में तब तक पूर्ण नहीं हैं जब तक उसे अपनों का साथ नहीं मिलता हैं ...

smshindi By Sonu said...

बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

vidya said...

करती है सब वो....मगर खुश होती है वो ऐसा करके...माँ जो है वो..

सुन्दर रचना..

Amrita Tanmay said...

सुन्दर अहसासों में भिंगोती रचना..