Monday, May 20, 2013

नव गीतिका



नव गीतिका 
यह रचना गजल नही है 
रौशनी कैद है और परेशान  है 
अब जमाने की ये ही तो पहचान है । 
हाँ मैं हाँ बस  करो और कुछ न कहो 
फिर तो सब से  भले आप  इन्सान हैं। 
भूल कर भी उठाया यदि प्रश्न तो 
आप इन्सान कब आप हैवान हैं । 
भूल जाओ यहाँ सच बड़ी चीज है 
संच कहने से मिलता नही मान है ।
आँख भी बंद हो , कान मुंह बंद हो 
फिर तो बन जाओगे आप परधान है। 
झूठ ही तुम कहो जोर से पर कहो 
मान लेंगे उसे लोग सच बात है ।
इस जमाने का कैसा ये दस्तूर है 
पूजते हैं उसे जो की बदमाश है । 
आप बच्चों के जैसे न बातें करें 
जिस से पूरा हो स्वारथ वो भगवान है । 
इस जमाने से कैसे लड़ोगे भला 
सांच अब न यहाँ  कोई हथियार है ।।   
डॉ वेद व्यथित 
09868842688 

Wednesday, April 10, 2013

शुभकामनायें

सभी मित्रों को शत्रुओं को अपनों को परायों को भारतीय नव वर्ष २ ० ७ ० की मेरी हार्दिक शुभकामनायें हैं । कृपया स्वीकार कर  के अनुग्रहित करें । 
ईश्वर इस वर्ष में आप को सभी सफलताएं प्रदान करें । आप की सत  मनोकामनाएं पूर्ण हों । आप के श्तुओं का विनाश हो । आप हर प्रकार से सुखी हों । 
डॉ वेद व्यथित 
09868842688 

Tuesday, March 26, 2013

होलिका उत्सव की मैं सभी मित्रों को शुभकामनायें प्रदान करता हूँ । साथ ही भक्त प्रहलाद के सत्याग्रह का स्मरण भी करवान चाहता हूँ की किस प्रकार असत्य से छोटे से बालक ने संघर्ष किया वह  अनुकरणीय है ईश्वर स्मरण ही होलिका उत्सव का मुख्य उद्देश्य और महातम है परन्तु आज केवल बुराइयां ही उत्सव मनाने का केंद्र बिंदु बन गईं हिं क्या यही उत्सव की पवित्रिता  है नही है इस से यह पवन पर्व अपावन हो जायेगा इस लिए पवन पर्व को हम पावन रीति से सम्पन्न करने ।
 शुभकामनायों सहित 
वेद व्यथित 

'हम कलम ' साहित्यिक  व् सांस्कृतिक संस्था की इस मास की  गोष्ठी होलीका पर्व को समर्पित रही । होलिका  उत्सव के उल्लास में डॉ  मृदुला सिन्हा ने बिहार के लोक जीवन में रचे बसे लोक  गीत ' फागुन में बुढवा  देवर लगे ' गुनगुना कर वातावरण को उल्लसित कर  दिया । डॉ वेद  प्रताप वैदिक ने इस अवसर पर सभी उपस्थित साहित्यकारों को अपनी शुभकामनायें प्रदान की । डॉ रमा सिंह ने होली के गीत सुना  कर सब को भाव विभोर कर दिया । व्यंगकार निशा भार्गव  ने अपने चिर परिचित अंदाज में व्यंग पढ़े । डॉ वेद  व्यथित ने रीतिकाल और उत्तर आधुनिक कल के माध्यम से अपना व्यंग प्रस्तुत किया । डॉ सुनीति रावत ,डॉ अमरनाथ अमर ,क्रांति वत्स 'डॉ रश्मि मल्होत्रा डॉ अर्चना त्रिपाठी डॉ  प्रभा किरन  जैन , प्रतिभा जौहरी जनक  सचदेव प्रवेश धवन  आभा कुल श्रेठ  प्रवेश धवन     आदि की  गोष्ठी में सार्थक  उपस्थिति रही  । डॉ संतोष गोयल  गोष्ठी का सफल संचालन किया  । 
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Wednesday, December 5, 2012

महा अभियोग 

उस पर निरापराध होने का 
अभियोग लगा 
पुलिस ने तफ्शीश शुरू की 
बहुत साक्ष्य जुटाए गये 
उस का टूटा मकान 
व न  कोई वाहन  न अवैध हथियार 
न कोई कीमती सामान 
जमानत के लायक भी 
भी नही थे कागजात 
और उस ने कर लिया था 
जुर्म का इक़बाल 
अब मुकद्दमा शुरू हुआ 
तारीख पर तारीख 
शुरू हुई 
गवाह पेश हुए 
सभी ने उस के
 निरापराध होने की गवाही दी 
एक दो गवाहों  ने
 मुकरने की कोशिश भी की 
परन्तु बात नही बनी 
आखिर उस पर अभियोग सिद्ध हुआ 
निर्णय स्थगित भी नही हुआ 
तुरंत सुना दिया गया 
सच्चाई की लड़ाई के लिए 
उसे काले पानी की सजा हुई 
लोगों ने फब्तियां कसीं 
-बड़ा बन रहा था 
ईमानदार की दुम 
ले लिया फल 
अब पता चल जायेगा 
जब जेल में जिन्दगी बिताएगा 
ईमानदारी का पूरा फल पायेगा ।।

Friday, November 9, 2012


 ॐ

तमसो माँ ज्योतिर्गमय 
भारतीय संस्कृति की उद्घोषणा तम  से प्रकाश की और बढ़ें  ,के साथ
आओ मिल कर प्रकाश पर्व मनाएं 
इस शुभ अवसर पर
आप को सपरिवार हार्दिक शुभकामनायें प्रदान 
करता हूँ 
कृपया स्वीकार करें 

मन दीप सजाया है 
दीवाली आई है 
खुशियों का उजाला है ।

दीपों का उत्सव है 
तुम्हें खुशियाँ  खूब मिलें 
मेरा ऐसा मन है ।

मन दीपक हो जाये 
अंधियारे दूर रहें 
उजियारा हो जाये ।

मन दीपक हो जाये 
खुशियों से भरे झोली 
सब खुशियाँ मिल जाएँ ।
निवेदक 
डॉ वेद व्यथित 
अनुकम्पा - 1577 सेक्टर 3 
फरीदाबाद 
09868842688

Saturday, October 20, 2012


रिज्युमे 
दाढ़ी वाले लम्बे तगड़े दो युवक मेरे मित्र भाई भरोसे लाल की दुकान पर आये । उन्होंने आते ही भाई भरोसे लाल से कहा कि 'अंकल हमे नौकरी के लिए चिठ्ठी लिखवानी है । मैं और मेरा मित्र भरोसे लाल उन की नौकरी के लिए चिठ्ठी को नही समझ सके । हम ने एक दुसरे की और देखा और वे दोनों भी समझ गये की हम मूर्ख  हैं हमारी समझ में ये भी नही आया की कहीं  भी नौकरी के लिए चिठ्ठी भेजनी पडती है भाई भरोसे लाल ने पूछा कि आप को किसी के लिए सिफारिशी चिठ्ठी लिखवानी है क्या ? बे बोले - अरे यार  अंकल नही वः चिठ्ठी जो नौकरी लगने  के लिए देनी पडती है दरखास्त । अच्छा भाई भरोसे लाल समझ गये कि ये अपना रिज्युमे  यानि विवरण बनवाना चाहते हैं परन्तु अंग्रेजी कम्पनियां विवरण कहाँ समझती हैं उन के लिए तो फ्रेंच का रिज्युमे ही चाहिए ।
भाई भरोसे लाल ने पूछा रिज्यूम बनवाना है क्या ? अब उन दोनों युवकों ने एक दुसरे की और देखा की यह रिज्यूम क्या है ? तब भाई भरोसे लाल ने बताया की नौकरी के लिए दी जाने वाली दरख्वास्त को ही भाई अब रिज्यूम कहते हैं ।तब उन्होंने कहा कि चलो तो व्ही बना दो पर बनाना बढिया सा जिस से बढिया सी नौकरी लग जाये क्यों अब हमे पुलिस ज्यादा ही तंग करने लगी है जब मर्जी आये बुलवा लेती है नौकरी लग जाएगी तो ठीक रहेगा । भरोसे लाल ने कहा कि अभी  बना देता हूँ साथ रूपये लगेंगे । तब वे बोले लाला जी आप रुपयों की चिंता मत करो साथ ही दे देंगे पर बनाना बढिया सा पर वैसे हम से कोई पैसे मांगता नही है । उन में से एक ने अपनी टी शर्ट थोड़ी सी उपर करते हुए पेंट में घुसा हुआ देसी कट्टा यानि पिस्तौल की और इशारा करते हुए कहा । भाई भरोसे लाल समझ गया की ये निश्चित ही गुंडा तत्व हैं । अब तो फंस ही गये हैं । हे भगवान जैसे तैसे शांति से निपट जाएँ बीएस । बेशक पुलिस पास ही क्यों न खड़ी हो पर वः भी इन का क्या कर  लेगी । वह  भी गुंडों से आसानी से नही उलझती है । वः तो केवल शरीफ आदमियों को तंग करने के लिए है ।
आखिर भाई भरोसे लाल चुप चाप उन का रिज्यूम बनाने में जुट गये वे बोले -  अपना नाम बताओ ?भरोसे लाल ने सहजता से पूछा तो उन दोनों ने एक दुसरे  की और देखा भरोसे लाल की उँगलियाँ कम्पुटर के की  बोर्ड पर रुक गईं  उन्होंने फिर पूछा कि भाई क्या नाम लिखूं ?
उस लडके ने कहा - उं उं ...कौन सा नाम लिखवाऊं ?
- अरे भाई नाम के है तुम्हारा ?
- अरे अंकल जी एक हो तो बताऊँ , अलग 2 शहरों की पुलिस में अलग 2 नाम दर्ज हैं या अपना गाँव वाला नाम ही बता दूं ?
अरे भाई जो मन करे वही  बता दो ।
- तो सोनू लिख  दो ।
- आगे क्या लिखूं ?
- ये आगे पीछे क्या होता है आगे पीछे कोई हो तो बताऊँ बस  सोनू लिख दो ।
- ठीक है पिता जी  का नाम बताओ ?
- पिता जी मतलब बाप का नाम बताऊं ?
 -हाँ भाई  बाप का नाम बताओ ?
 -लिखदो मेहर ।
 -भाई मेहर खान लिखूं या सिंह ?
-जो मर्जी आये लिख दो खां और सिंह से क्या फर्क पड़ता है रहेंगे तो हम हम ही वही  दस नम्बरी ।
- घर का पता बताओ ?
- इसे खाली  छोड़ दो जहाँ दरखास्त देंगे वही  का भर देंगे ।
- पढ़ाई  बताओ क्या 2 पास किया है ?
- अरे अंकल पास तो हम बहुत  कुछ हैं जेब काटने से ले कर  चोरी डैकेती अपहरण हत्या सब में पास हैं ।
- अरे भाई कोई स्कूल की पढाई  बताओ ?
-अंकल पढाई  कहाँ कर  पाए हैं पढाई  करते तो ये काम  ही क्यों  करते पढाई कर  लेते तो बड़े 2 घोटाले आराम से करते रहते पुलिस पीछे क्यों पड़ी रहती उल्टा हमे ही सलाम  मरती बस  अंग्रेजी  ही तो नही आती गिनती तो हम ने चौथी में ही सिख ली थी पर इस में दसवीं पास लिख दो क्यों भाई ठीक है न ?
उस ने अपने दोस्त की और मुखातिब होते हुए कहा तब दूसरा  यानि उस का दोस्त बोला 
- पर  तेरे पास तो पांचवीं पास का भी सटीटिकट (सर्टीफिकेट )नही है ।
ले तू भी है खूब सटीटिकट का क्या है तू बता जितनी पास का कहे बनवा दूंगा याद  है न जेल में वह  पतला सा आदमी मिला  था न वह  यही कम तो करता है पास करवा कर  लोगों को पढ़े लिखे बनवाने का उस से ही बनवा लेंगे दसवीं पास का सटीटिकट और वो तो हम से पैसे भी नही लेगा अपनी ही लाइन  का आदमी है ।
अंकल लिख दो दसवीं पास ।
- ठीक है लिख दिया ।अब बताओ  कौन 2 सी भाषाएँ  जानते हो ?
- भाषा ?
 -अरे भाई बोलियाँ   कितनी जानते हो ?
- सब जानते हैं जहाँ चले जाएँ वहीं  की बोल लेते हैं परन्तु पुलिस की बोली तो हम खूब समझते हैं और पुलिस भी हमारी बोली खूब जानती है ।
- अरे भाई हिंदी अंग्रेजी पंजाबी ऐसी बोली बताओ ।
- अंकल बताया न आप कप अंग्रेजी अति तो यहीं आते आप के पास अंग्रेजी आती तो नेता हमे दिन में ही अपने पास बुलवाया करते पर अंग्रेजी नही आती इस लिए रत में बुलाते हैं अपने काम करवाने के लिए हिंदी लिख  दो ।
- ठीक है एक्सपीरियंस बताओ ?
 -इस का मतलब ?
 -इस का मतलब है आप का क्या 2 अनुभव है ।
- अंकल अनुभव तो हमे हर चीज का है दुनिया का कोई ऐसा ताला  नही है जिसे हम खोल या तोड़ न सकें कोई गाड़ी ऐसी नही है जिसे हम खोल न लें डैकेती अपहरण आदि तो हमारे बाएं हाथ के खेल हैं ये सब अनुभव हैं ।
ये सब सुन क्र भाई भरोसे लाल बोले -भाई तुम तो बहुत महान हो तुम्हारी आवश्यकता तो पुलिस में बहुत  ठीक रहेगी तुम तो थानेदार बनने के के लिए दरखास्त दो पर कुछ और अनुभव भी बताओ ? ये तो दो पन्ने भी नही भरे ।
- अरे अंकल और अनुभव तो हमारे बहुत सारे  हैं कई 2 राज्यों की पुलिस हमारे पीछे पड़ी रहती है हमे तो हर राज्य में डैकेती का अनुभव है और ज्यादा करो तो लिख दो हमारे फोन से ही लोग हमे चुपचाप रंगदारी भेज देते हैं हम चाहे  जेल में हों या बाहर हों और आस पास की पुलिस तो हमे छेड़ने की हिम्मत  भी नही करती है वे तो बाहर की पुलिस के साथ मजबूरी में ही आते हैं और उस का भी हमे पहले ही पता चल जाता है ।
- इस में कितने पैसे तनखाह के लिखूं की कितने पर कम करोगे ?
- यह तो हम पार्टी देख कर तय  कर लेंगे कि कितने दे सकता है ?उस का दफ्तर व् गाड़ियाँ आदि देख कर  पता चल जाता है ।
- भाई और कुछ लिखना है क्या ?
अंकल यह भी लिख दो की नौकरी नही दी तो फिर देख लेना हम कौन हैं ?
आखिर जैसे तैसे भाई भरोसे लाल ने उन का विवरण यानि रिज्यूम बनया और उन के हाथ में थमा दिया बिना पैसे मांगे ही ।परन्तु फिर भी उन्होंने सौ का करार सा नोट निकल कर भाई भरोसे लाल के हाथ में थमा दिया भाई भरोसे लाल बोले की भाई दस बीस जो खुले हो वही  दे दो मेरे पास खुले पैसे नही हैं तब वः बोला - अरे अंकल आप भी कैसी बात करते हो हम भी तो आप के बच्चे हैं आप इस में से भी क्या वापिस देंगे इसे रखो अपने पास इस में से भी क्या वापिस दोगे  । तब भाई भरोसे लाल बोले की भाई बच्चे ही हो तो फिर तुम से क्या लेना तुम ही रख लो ।भरोसे लाल ने सोचा की कहीं सौ के पांच  सौ न मांगने लगें इन का क्या है तब दोनों बोले नही अंकल जी रहने दो कम हों तो बताओ और दें और वे उस रिज्यूम को ले कर वहन से चलते बने ।
उन के जाने  के बाद भाई भरोसे लाल ने उन का दिया हुआ सौ का करार नोट ध्यान से देखा उस में गाँधी जी तो थे पर उन का चश्मा गायब था यानि सौ का नोट एक दम  सौ प्रतिशत नकली था जिन से उन की जेब भरी हुई थी जिन में पांच सौ के नोट ही ज्यादा थे परन्तु फिर भी गनीमत रही कि वे गल्ले के पैसे छीन कर नही ले गये व बदतमीजी नहीकी ये क्या कम है नही तो गला पकड़ते और सारे पैसे भी छीन ले जाते बेचार  बड़े भले थे एक दम शरीफ व बड़े आदमियों के जैसे ।
भरोसे लाल के हाथ में वही  करार सा नोट था कभी वह  उसे देखता और कभी कम्प्यूटर में दिख रही अपनी  मुरझाई शक्ल को पर वह अब इस नोट का क्या करे पुलिस को दे या फाड़ कर फैंक दे इसे ले कर यदि वह पुलिस के पास गया तो पुलिस उसे ही वहीं  बैठा लेगी और नकली मुद्रा के कानून में फंसा देगी या उलटे उसे ही और पैसे देने पड़  जायेंगे पर पुलिस को न बताना भी तो अपराध है भरोसे लाल के माथे पर पसीना आ गया कि  वह अब क्या करे क्यों की वह भी तो एक शरीफ व् इज्जतदार इन्सान है ।
डॉ वेद व्यथित 
अनुकम्पा - 1577 सेक्टर -3 
फरीदाबाद 121004 
09868842688