Friday, August 24, 2012


सामने देखो 
पहले समय में कुछ काम ऐसे होते थे जिन को सिखने के लिए बाकायदा कोई कोर्स करने की जरूरत नही पडती थी जैसे आप बचपन में ही घर वालों को बिना बताये ही चोरी छुपे साईकिल चलाना सीख लेते थे | उस के लिए आप को किसी स्कूल में ट्रेनिग लेने  की जरूरत नही पडती थी वैसे ही फोटो ग्राफी भी ऐसे ही ऐसे ही आ जाती थी और फिर एक कैमर खरीद कर मोहल्ले में ही फोटो ग्राफी कि दुकान शुरू हो जाती है थी |
इसी तरह की फोटो ग्राफी की दुकान मेरे मित्र भाई भरोसे लाल के पडोस में भी खुल गई | भाई भरोसे लाला का पड़ोसी होने के नाते फोटो ग्राफर उन्हें रोज इस लिए भी राम २ करता था कि कभी तो ये भी फोटो ग्राफी का काम करवाएंगे ही या किसी और से सिफारिश  कर के काम दिलवाएंगे और  कभी २ तो वह कह भी देता कि ताऊ जी मेरा भी ख्याल रखना | भाई भरोसे लाल भी चाहता था कि इस बेरोजगार युवक का किसी तरह रोजगार चल निकले | इसी लिए भाई भाई बरोसे लाल ने अपने घर पर अपने पोते का जन्म दिन मनवाया कि चलो इस बहाने  उस फोटो ग्राफर को भी काम मिल जायेगा |
पार्टी शाम को रखी गई | भाई भरोसे  लाल ने फोटो ग्राफर को कई दिन पहले ही बता दिया कि रविवार की शाम को पार्टी होनी है और  तुम फोटो खींच देना साथ ही यह भी  कहा  कि देखो फोटो बहुत बढिया खींचना , खराब न हो जाएँ | सब घरवाले तो मना कर रहे हैं किसी और से फोटो खिंचवायेंगे पर  मैंने उन से जिद्द कर के तुम से ही फोटो खिंचवाने का फैंसला किया है | साथ ही उन्होंने एक बात और कही कि समय पर अपने आप पहुंच जाना उस दिन तुम्हे ढूंढना न पड़े |फोटो ग्राफर ने भाई भरोसे लाल से पहले भी कई बार की गई अपनी बड़ाई  को दोहराया और दोनों बातों के प्रति आश्वस्त किया कि आप चिंता मत करो बहुत बढिया फोटो बनाऊंगा और अपने आप समय पर पहुंच जाऊंगा  आप बिलकुल भी चिंता न करें | यह तो मेरे घर का ही काम समझो | भाई भरोसे लाल उस की बातों से खूब आश्वस्त हो गये |
पार्टी का दिन आ ही गया | भाई भरोसे लाल सुबह ही जा कर देख आये की उस की दुकान खुली या नही | फोटो ग्राफर उन्हें दूर से दूर से ही सफाई करता दिख गया तो भरोसे लाल को तसल्ली हो गई कि फोटो ग्राफर आ गया है परन्तु उन्होंने फिर भी उस की दुकान पर जा कर उसे याद दिला दिया ही कि भाई शाम को कहीं चले मत जाना समयपर पहुंच जाना | उस ने फिर वही वाक्य दोहराए कि आप चिंता मत करो | धीरे २ शाम होने शाम होने लगी और पार्टी का समय भी आ ही गया |
यह कस्बे की जन्म दिन यानि बर्थ दे पार्टी थी यहाँ वैसे तो ज्यादातर लोग   बच्चे के जन्म  दिन पर कथा कीर्तन करवा कर सब को प्रसाद बंटवा  देते थे  |उस समय न उपहार का आदान  प्रदान और न ही मोमबत्ती  बुझाते हुए थूक के कण पड़े केक का वितरण ही होता था और कई बार तो नासमझी  में प्रसाद समझ  कर जो लोग शाकाहारी होते हैं उन्हें भी अंडे का केक खाना पड़ जाता था |
घर में चहल पहल  होनी शुरू हो गई | जिन के केवल बच्चे ही बुलाये गये थे उन की मम्मियां भी साथ आ गईं कई अपने छोटे भाई बहनों  को भी साथ ले आये कि वहाँ कागज की टोपी व टॉफी मिलेगी | बच्चो ने चिल्ल  पौं मचा कर धमाल मचाना शुरू कर दिया  भरोसे लाल ने कई बार घड़ी देखी और फिर दरवाजे की ओर देखा सोचा चलो एक आधा घंटा तो लेट चल ही जाता है आ जायेगा परन्तु पूरे दो घंटे हो गये फोटो ग्राफर अभी दूर २ तक भी  दिखाई नही दे रहा था कुछ छोटे बच्चे ज्यादा समय हो जाने   के कारण रोने लगे उन्हें चुप करवाना टेढ़ी खीर थी क्यों की लग रहा था कि ये टॉफी व टोपी अभी क्यों नही मिल रहा कुछ को शू २ आने लगा कुछ बार २ पानी मांगने लगे और जो औरतें बच्चो के साथ आ गईं थी वे खाने पर आमंत्रित नही थी अत: उन्हें घर जा कर खाना  बनाना था उन के लिए देर हो रही थी क्यों कि उन के पति देव घर पहुंच चुके थे और वे उन्हें घर वापिस आने का संदेशा भी भिजवा चुके थे |
इस भीच भाई भरोसे लाल कई बार बच्चो से फोटो ग्राफर को उस  की दुकान पर दिखवा चुके थे पर वह तो दुकान पर ही नही था | अब क्या किया जाये आखिर इंतजार कर के केक काट  ही लिया गया बिना फोटो खींचे ही |जैसे ही केक  कटा  इतने में ही फोटो ग्राफर भी आ गया भरोसे लाल को गुस्सा तो बहुत आ रहा था पर पार्टी के कारण उस गुस्से को दबा गया | फोटो ग्राफर ने तुरंत कैमरा निकल कर फ्लेश मारनी शुरू कर दी फोटो ग्राफर अपने एक्शन में आ गया और बाक़ी सध गये यानि अलर्ट हो गये महिलाओं ने रोते बच्चों की आँख और टपकती नाक फटाफट अपनी २ साड़ी के पल्लू से साफ की कुछ छोटे बच्चों  व बड़ों ने भी अपने बाल उन्गलियां  फेर कर ही संवार  लिए कुछ ने अपने कालर  आदि को कंधों को झटका दे २ कर ठीक कर लिया अब फोटो ग्राफर ने भरोसे लाल को कहा  आप चाकू पकड़ो और केक पर लगाओ तभी किसी ने कहा केक तो कट चुका है तब फोटो ग्राफर ने समझाया कोई बात नही केक का फोटो तो होना चाहिए हाँ जी केक पर चाकू रखो भरोसे  लाल ने पोते के हाथ में दे कर दुबारा कटवाने का अभिनय किया अब बारी आई केक खाने और खिलने की तो सब से पहले जिस का जन्म दिन था केक भी उसी को पहले खिलाया जाना चाहिए इस लिए भाई भरोसे लाल ने केक का बड़ा सा टुकड़ा उठा कर पोते के मुंह की तरफ किया तुंरत फोटो ग्राफर ने कहा - ताऊ जी समाने देखो भाई भरोसे लाल सामने देख कर पोते को केक खिलने लगा अब भला आप देखो किधर और हाथ किधर हो तो वह बिना देखे कैसे सही जगह पर जा सकता है | इसी चक्कर में केक बच्चे के मुंह के बजाय नाक में चला गया बच्चा रोने लगा अब भला रोते हुए बच्चे का फोटो कैसे खिंचा जाये तो जैसे तैसे बच्चे को चुप करवाया गया तो बच्चे की माँ केक खिलने लगी फोटोग्राफर ने उसे भी समाने देखने का आदेश दिया तो और भी गडबड हो गई एक तो उस ने जैसे तैसे थोडा सा घुंघट उठाया ताकि बादलों से ही  सही कम से कम चाँद दिखे तो  पर ससुर जी भी वहीं खड़े थे तो और फोटो ग्राफर का आदेश तह सामने देखो तो इस बार बच्चे के मुंह में जाने के बजाय पोते को गोद में उठाये भरोसे  लाल की मूछों  से जा टकराया  परन्तु फोटो ग्राफर  फिर भी सब को सामने देखो कहने से बाज  नही आया |
इसी तरह इस फोटो ग्राफर की सामने देखने की बात ने एक बार बड़ी गडबड कर दी होती | उस के पास देहात में एक शादी की फ्रोतो ग्राफी करने का काम मिला देहात में तो कैर देख कर वैसे ही लोग इकठ्ठे हो जाते हैं और शादी में तो वैसे भी भीड़ भाड़ थी और देहात में जब खेत बिक जाएँ तो कुछ दिन तक तो किसान बहुत पैसे वाला हो जाते है इसी लिए फोटो ग्राफर लडके वालों की मर्जी से जबरदस्ती बुलवाया गया |दुल्हन को तो शादी में वैसे ही जबर दस्ती शरमाना  होता ही है |वर वधू का माल्या अर्पण  यानि  जय माला का कार्य कर्म शुरू हो गया फोटो ग्राफर बार २ रट लगा रहा था - सामने देखो सामने देखो | दूल्हा अपनी अकड में था विवाह मंच पर दूल्हे के हुड़दंगी  दोस्त भी बरती होने के नाते बर्राए हुए और बोराए हुए  थे | दुल्हन में दूल्हे को  माला पहनाने के लिए हाथ उठा कर जैसे ही आगे बढाये वैसे ही फोटो ग्राफर ने खा  सामने देखो और इतने ही बगल से दोस्तों का एक धक्का दूल्हा को लगा दूल्हा अपनी जगह से खिसक गया उस की जगह दूसरा लड़का आ गया दुल्हन सामने देख ही रही थी और माला पहुंच गई दूल्हे के बजाय उस के दोस्त के सिर के करीब वो तो दुल्हन की छोटी बहन तेज थी उस ने दुल्हन को तुरंत रोका नही तो रंग में बड़ा भयंकर भंग पड़ जाती और लेने  के देने पड़ जाते |
इसी प्रकार एक बार एक श्रन्द्धाजली  सभा थी जो पहले जमाने में घर के सब से बड़े लडके के सिर पर जिम्मेदारी का अहसास दिलाने के रूप में पगड़ी बाँधने की रीति  के रूप में थी पर अब यह रीति यानि रस्म तो गौण हो गई अपितु झूठ मूठ दिखावा करने के लिए शोक सभाओं का पर जोर दिया जाने लगा है जिस में कई ऐसे २ लोग बोलने आ जाते हैं जिन्होंने बेशक दिवंगत व्यक्ति को एक बार भी देखा नही होता है परन्तु श्रद्धांजली सभा को रौबदार बनाने के लिए नेताओं को बुलाने का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है ताकि वे कह सकें कि जब हमारा बाप मरा था तो कैसे २ बड़े २ नेता आये थे यानि मक्कार लोग इकठ्ठे हुए थे जिन में सफेद पोश चोर डकैत सभी थे | ऐसी ही एक शोक  सभा में एक नेता जी जैसे ही दिवंगत व्यक्ति के चित्र पर फूल  चढ़ने लगे वैसे ही फोटो ग्राफर ने नेता जी को कहा  सामने देखो| नेता जी सामने देख कर चित्र पर फूल चढ़ने लगे पर सामने देखने के चक्कर में उन के फूल चित्र पर  गिरने के बजाय चित्र के नजदीक बैठे व्यक्ति पर गिर गये | पर को कहि सके बड़ेन को लखि बड़ेन की भूल |
यहाँ भी यही हुआ नेता जी को तो कौन क्या कह सकता था | पर जिस पर गिरे  उस  ने जैसे तैसे अपने उपर से वे फूल तो झाड  लिए  पर पस उस के मन में एक वहम बैठ गया कि ये शोक के फूल थे जो उस के उपर गिर गये थे इन से कहीं  कोई अनहोनी न हो जाये | बेचारा परेशान हो गया और आप को पता ही है कि  मन की परेशानी  के कारण  ही बहुत  सी परेशानियाँ बिना बात भी आनी शुरू  हो जाती हैं |इस के कारण  ही उसे  अपने अंदर कुछ बीमारी महसूस होनी लगी उस ने इन्हें दूर करने के लिए बहुत  से टोने टोटके करवाए जो जिस ने कहा  उस ने इन्हें दूर करने का वैसा ही बेवकूफी भरा कम किया परन्तु उन से होना तो कुछ नही था एक दिन अनायास उस की मुझ से भेंट हो गई | उस ने मुझे भी अपना दुखड़ा सुनाया मुझे भी चिंता हुई कि अच्छा भाल आदमी था जो फोटो ग्राफर के सामने दिखने के चक्कर में  बिना वजह वहम हो जाने से परेशान हो गया है | क्यों कि उस पर फोटो ग्राफर और नेता जी का सीधा असर हो रहा थ डाइरेक्ट एक्शन |
मैंने मन ही मन सोचा कि इस के वहम का इलाज होना बड़ा जरूरी है यदि इलाज नही हुआ तो इसे जरूर कुछ हो जायेगा | मैंने उसे काहा  कि मैं तुम्हे एक बहुत ही बढिया सस्ता और आजमाया हुआ इलाज बता सकता हूँ |उस ने बड़ी कृतज्ञता भाव से तुरंत बताने का आग्रह किया तब मैंने उसे बताया कि किसी तरह  तुम उन्ही नेता जी का एक फोटो यानि चित्र ले आओ और उस के सामने गूगल की  नही गुलाब की अगर बत्ती जलाना और उस के चित्र के सामने देसी घी या तेल का नही अपितु रिफाइंड तेल का दीपक जलाना और उस के बाद वैसे ही फूल जैसे तुम्हारे उपर गिरे थे ऐसे ही ले लेना उन्हें ला कर नेता जी चित्र के सामने एक पैर पर खड़े हो कर उन के चित्र पर चढ़ा देना उस इस  में भी कुछ शंका थी कि वह इस से ठीक हो जायेगा क्या ?तब मैंने उसे बताया कि यदि भ्रष्ट नेताओं के चित्रों पर फूल  चढ़ जाये तो तुम क्या पूरा देश और देश की सारी व्यवस्था ही ठीक हो जाये |
इसी बीच मेरे मित्र भाई भरोसे लाल के छोटे लडके की शादी टी हो गई सब इंतजाम पूरे हो गये और फोटो ग्राफर तो अपना मौहल्ले वाला है ही पुरानी जान पहचान का , उसे भी बता दिया गया शादी की रीती रिवाज शुरू हो गये बरात  वापिस भी आ गई | फोटो ग्राफर ने सामने दिखा २ कर खूब चित्र खींचे | पर हमारे यहाँ तो बरात  के लौटने के बाद भी कई तरह के रीती रिवाज होते हैं जो कई दिन  बाद तक  भी चलते रहते हैं इसी प्रकार के एक नेग यानि रीती में वर वधू मन्दिर गये वहाँ पूजा हुई पूजा के बाद जैसे ही लड़का माँ के पैर छूने  को झुका फोटो ग्राफर ने कहा  सामने देखो और वह सामने देख कर माँ के पैर छूने  लगा माँ  के पास ही उस की नई नवेली वधू भी खड़ी थी | अब वह तो सामने देख रहा था और सामने देख कर पैर छोने के चक्कर में उस के हाथ माँ के पैरो पर जाने के बजाय  बहू के पैरों तक पहुंच गये और फोटो ग्राफर ने क्लिक कर दिया क्यों कि उस का चहेरा तो पूरा दिखाई ही दे रहा था बात तो मुंह दिखने की  या चेहरा  दिखने की है पैर छूने  की थोड़ी है |
अब क्या  था फोटो खींच ही चुका था और और उसे हटाना फोटो ग्राफर  का नुकसान था सो वह अपना नुकसान क्यों करता इस लिए चुप चाप एल्बम में भी लगा दिया जब एल  बम बन कर घर आई तो सब को अपने २ चहरे देखने की जल्दी थी ही सब लोग इकठ्ठे हो गया एक २ फोटो को सब ध्यान से देख रहे थे पर एक फोटो को देख कर सब हैरान हो गये एक ने पूछ भी लिया कि आप के यहाँ यह कौन सी रित है जिस में लड़का बहू के पैर छूता  है यह देख कर सब हैरान  हो गये क्यों कि भारत क्या भारत के बाहर भी पूरे विश्व में कोई देश ऐसा नही होगा जहाँ लड़का अपनी घरवाली के पैर छूता  हो या ऐसा रिवाज हो परन्तु वैसे भी पैर छूने की  रीत तो केवल भारत में ही है या भारत वंशी जहाँ २ गये वहाँ २ भी अभी जीवित है | पर वहाँ २ भी घरवाली के पैर कोई नही छूता |
तब सब ने पुछा तो फिर यह फोटो में क्या हो रहा है सब ने देखा लडके के हाथ बहू के पैरों के पास हैं  और माँ पास खड़ी है | लडके ने तुंरत फोटो निकल कर फाड़ना चाहा पर सब ने कहा  कि फोटो फाड़ना तो बड़ा अपशकुन होता है अब खींच गया है कोई बात नही तेरी ही तो घरवाली है क्या हो गया तू  माता जी के पैर ही तो छु रहा था यह तो फोटो ग्राफर के सामने देखने के चक्कर में बहू माता के पैरों को गलती से हाथ लग गया और यह तो सारी उम्र तेरे और तेरे घर वालों के पैर छूती रहेगी तूने  एक बार छू लिए तो कौन सी आफत हो गई |
परन्तु पैर तो पैर ही हैं वे छूने  के लिए ही तो होते हैं और पैर छूने की परम्परा  तो यहाँ बहुत पुरानी है हमारे यहाँ सुबह उठते ही सब से पहला काम पैर छूने का होता था इसी लिए भगवान श्री राम जी तक बड़ों के पैर छूते थे संत सूरदास जी ने भी इसी लिए यह पड़ गया होगा " चरण कमल बंदौ हरी राई" तो यहाँ भी सब से सुकोमल कमल जैसे चरण नव वधू यानि नई नवेली दुल्हन के ही तो थे तो फिर उस के छू लिए तो क्या हो गया यह तो भक्ति की बात है |परन्तु चलो यहाँ तो अपनी ही घरवाली  वाली थीपरन्तु यदि सामने देखने के चक्कर में हाथ कहीं और को छू जाता या लग जाता तो क्या होता बताने की जरूरत नही है |
इसी लिए किसी और के कहने में आ कर या बहकावे में आकर कभी कोई ऐसा काम करना जो अनसमझ  फोटो ग्राफर जैसे लोग करवा देते हैं और हम अपना चेहरा  दिखने के चक्कर में कुछ भी कर देते हैं या हम दूसरों के बहकावे में आकर या दूसरों के कहने से गलत लोगों को चुन कर गलत लोगों की सरकार बनवा देते हैं और फिर पांच साल तक पछताते रहते है इस लिए किसी के बहकावे में आने के बजाय खुद जिधर मर्जी आये देखना फिर परखना और तब कोई काम  करना फिर देखना कितना मजा आएगा और सब कुछ ठीक भी हो जायेगा |  

1 comment:

India Darpan said...

बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
बधाई

इंडिया दर्पण
पर भी पधारेँ।